प्लेटो और अरस्तू पर भारतीय दर्शन की छाप

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नें जब विकसित भारत के लक्ष्य को राष्ट्र के सामने रखा तब उन्होंने कहा था कि किसी भी राष्ट्र के जीवन में एक ऐसा कालखंड अवश्य आता है जब वह अपनी प्रगति की यात्रा को तेज कर सकता है। वर्ष 2022 से वर्ष 2047 तक आगामी 25 वर्ष ऐसा ही अमूल्य कालखंड भारत के लिए है। यह भारत के इतिहास का न सिर्फ निर्णायक युग है बल्कि एक लंबी छलांग लगाने को भी भारत तैयार है। इस अवधि में केवल नई ऊँचाइयाँ प्राप्त करना लक्ष्य नहीं है बल्कि जो खो चुका उसे वापस पाना और जो भुला चुके उसपर पुनः अधिकार साबित करना भी एक कार्य है। भारत सरकार बहुआयामी तरीके से अमृत काल में कार्यरत है परंतु महत्वपूर्ण है अकादमिक भागेदारी जिसकी जिम्मेदारी इस देश के युवाओं विशेषकर शोधार्थियों पर है। भारत नें अनेक ऐसी विपरीत परिस्थितियों का सामना किया है जिसमें विश्व की अनेक सभ्यताएं नष्ट हो गईं परंतु एक विशेष ऊर्जा समय समय पर भारत को जीवंत बनाए रखने के लिए कार्य करती है। भारत की पवित्र भूमि में एक विशिष्ट ऊर्जा और जीवन शक्ति समाहित है जिसनें न सिर्फ आदि काल से इस धरा को सुरक्षित रखा बल्कि हर हमले के बाद पुनः...