समाज
की नियति, राष्ट्र का भाग्य, काल चक्र और सत्ता के लिए
अवसर, जब इन चारों का मिलन होता है तो वह गाथा लिखी
जाती है जिसकी कल्पना कभी नही की जा सकती। विश्व में कोरोना महामारी का प्रकोप बढ़ा
तो एक के बाद एक ऐसी घटनाएँ घटी जो कि कल्पना से परे थी। इस महामारी ने उन देशों
को हिला कर रख दिया जिनके हर छोटे बड़े फैसले से विश्व प्रभावित होता है। अमेरिका, यूरोप और एशिया की आर्थिक, सैन्य महाशक्तियां
जैसे चीन, भारत, जापान, कोरिया आदि सभी कोरोना से प्रभावित हुए। किसी भी देश के लिए कोरोना वायरस
आर्थिक, सामाजिक और राजनैतिक नुकसान लेकर आया सिवाय
भारत के। भारत इसमें अपवाद है क्योकि आर्थिक नुकसान तो हुआ लेकिन हमारा राजनैतिक
और सामाजिक नुकसान नही हुआ। विश्व में आये बदलाव के बिलकुल अलग भारत ने सामाजिक और
राजनैतिक मजबूती के लिए इस महामारी को इस्तेमाल किया। जैसा कि मैंने शुरू में
कहा.. "समाज की नियति, राष्ट्र का भाग्य, काल चक्र और सत्ता के लिए उपयुक्त अवसर, जब इन
चारों का मिलन होता है तो वह गाथा लिखी जाती है जिसकी कल्पना कभी नही की जा
सकती"। विश्व में कोई भी परिस्थिति बिना मानव के उठाये कदमों के कारण नही
बनती लेकिन साथ में नियति भी है, जिसका मतलब कब क्या
होना है, वह पहले से तय है। कोरोना वायरस के कारण यह
आवश्यक था की देश को बंद कर दिया जाये। लॉकडाउन का एलान किसी भी समाज को निराशा
में धकेल सकता है। किसी भी देश में विद्रोह को जन्म दे सकता। खासकर उस देश में
जहाँ एक बड़ी जनसंख्या सिमित संसाधनों के साथ अनेकों समस्याओं के बीच रहती हो, वंहा के हालात क्या हो सकते हैं? हम सिर्फ सोच
कर ही घबरा जाते हैं। भारत में लॉकडाउन जब लागु हुआ तब तक हम सब इसकी जरूरत समझ
चुके थे। जनता कर्फ्यू के साथ भारतीयों ने अपने स्वयं अनुशासन का परिचय दुनिया को
दिया और उसके बाद तय नीति अनुसार भारत में लम्बा लॉकडाउन घोषित कर दिया गया। एक
लम्बा समय घरों में कैद रहकर कैसा काटा जाये? डर के
माहौल में आशा की ज्योति और एक दृढसंकल्प की भावना समाज में कैसे आये? यह सब वो विषय थे जिसका उत्तर विश्व के सभी देश खोज रहे थे। भारत ने सबसे
एक कदम आगे बढकर तय किया की राष्ट्रीय सरकारी चैनल पर विश्व के सबसे महाग्रंथ पर
बने रामायण सीरियल का पुनः प्रसारण किया जायेगा। यह एक फैसला भारत के अंदर युग
परिवर्तन सिद्ध होगा, इसकी कल्पना किसी ने नही की थी।
श्री राम का चरित्र आदर्श चरित्र है यह हम सब जानते हैं लेकिन क्यों है? शायद इससे हम नही जुड़े थे। खासकर युवा पीढ़ी और युवा पीढ़ी भारत की कुल
जनसंख्या की 65 फीसदी है, वह श्री राम से राजनैतिक रूप से जुडी थी, आस्था
रूप से जुडी थी लेकिन जीवन ,मूल्यों, परम्पराओं, आदर्शों का जो शिलालेख श्री राम ने
बनाया, उससे हम परिचित नही थे। किस्स्से कहानियों में
सुन लेना, विशेषण इस्तेमाल कर लेना, जय श्री राम के नारे लगा देना सिर्फ इतना राम नही है। श्री राम नाम स्वयं
में एक लम्बा और गौरवशाली इतिहास है। आदर्शों और जीवनमूल्यों की अमर कहानी है।
दायित्वबोध और आपसी सम्बन्धों के बारे में बताती ज्ञान रूपी गंगा है।
जब रामायण भारत में पुनः प्रसारित हुई तो केंद्र में सत्ता में बैठे लोग वो थे जो वर्षों से श्री राम के मन्दिर
के लिए संघर्षरत रहे हैं और करीब 500 वर्ष बाद
श्री राम मन्दिर की पुनर्स्थापना करके ही रुके हैं। भारत की राजनैतिक सत्ता का रूप
भी ऐसा है की राम विरोधी लोग ऊँगली उठाने तक की स्थिति में नही है। रामायण प्रसारण
बड़ी बात नही, बल्कि बड़ी बात है परिवारों का उससे जुड़ना।
लॉकडाउन में घरों पर रहना सबकी मजबूरी थी। ऐसे में रामायण से न सिर्फ वो पीढ़ी सीधे
जुड़ी जिसने 80 के दशक में प्रथम प्रसारण पुरे
भक्ति भाव से देखा था। इसके साथ वो पीढ़ी जो युवा है, समझदार
है, जिनके कंधों पर समाज और राष्ट्र का भार है, और भविष्य की पीढ़ी यानि बच्चे। हजारों वर्ष पूर्व भारत के सबसे बड़े शाही
घराने रघुकुल के राजकुमार जिसके इछ्वान्कू वंश का शासन सम्पूर्ण पृथ्वी पर हो, चक्रवर्ती राजा-महाराजा जिस वंश में हुए, दुनिया के सभी राज्य जिनकी अधीनता स्वीकार करते हो, उस शाही परिवार का एक युवा राजकुमार जिसे युवराज घोषित किया जाना है यानि
कल का राजा तय होना है, वह पिता के वचन के सम्मान के
लिए सब कुछ छोडकर वनवास के लिए वनों में चला जाता है। ऐसा पिता भक्ति का चरित्र
दुनिया की किसी भी देश की किसी भी कहानी में नही मिलता। कौशल देश के ही पड़ोसी
मिथिला देश की राजकुमारी जोकि बचपन से शाही परिवार में पली बढ़ी, जिसके पिता स्वयं ब्रह्मा के वंशजो द्वारा स्थापित जनक परम्परा के जनक हो, जो राजकुमारी विश्व के सबसे बड़े राजघराने कौशल की बहु बन जाती हो, वो अपने पति के लिए सब कुछ त्यागकर वन का रास्ता चुन ले, यह चरित्र विश्व के किसी भी कोने में नही मिलता। अपने भाई के लिए लक्ष्मण
का वन जाना, युवा पीढ़ी को झंकझोर देता है। विश्व के हर
कोने में सत्ता के लिए संघर्ष की अनेकों कहानियां है। सत्ता के लिए न जाने कितने
परिवारों में खून बहा है। पिता पुत्र के बीच की अंतर्कलाह की न जाने कितनी
कहानियां इतिहास का हिस्सा हैं। रामायण में भरत का इतना बड़ा शासन राम की
अनुपस्थिति के कारण नही अपनाना, श्री राम के वनवास
भोगने के दृढसंकल्प को देखकर उनकी चरण पादुका को सिंहासन पर स्थापित करके, स्वयं राजधानी से दूर वनवासी स्थिति में रहकर राज्य करना, यह न सिर्फ भारत बल्कि दुनिया के सभी देशों, सभी
सभ्यताओं को अद्भुत उदहारण पेश करता है। मित्र धर्म के लिए सुग्रीव-राम की मित्रता व् लंका विजय, मित्र के लिए सब
कुछ कर जाने की अद्भुत मिशाल है। राम वनवास से लेकर रावणवध तक रामायण की कहानी ने
भारतीयों को जिस प्रकार अपने से जोड़ा वह अभूतपूर्व है। रामायण एक पुराना सीरियल है।
जिस तकनीक और ग्राफ़िक्स का इस्तेमाल इसको बनाने में हुआ वह भी आज के जमाने के लिए
गुजरी बात है। कहानी भी नई नही है। न जाने कितनी बार हम सुन चुके हैं फिर भी जिस
प्रकार राम चरित्र को ध्यान से देखा गया उसकी कहानी बयाँ करती है बार्क की रेटिंग।
रेटिंग अनुसार देश में रामायण शुरू होने से लेकर अंत तक भारत का सबसे ज्यादा देखे
जाने वाला सीरियल रहा। रामायण के रात 09 बजे से 10 बजे तक प्रसारित होने के कारण और भारी दर्शक जुड़ने के कारण मीडिया चैनलों
को भी अपने 9 बजे के प्राइम टाइम में बदलाव करना
पड़ा। सुबह और शाम प्रसारित होते रामायण से समाज का जुडाव इसके प्रथम प्रसारण से भी
ज्यादा रहा। नये तकनीक के युग में रामायण का प्रसारण सोशल मीडिया में छाया रहा। #Ramayan और #RamayanOnDDnational टॉप ट्रेंड रहने
लगे। कोरोना वायरस के कारण #CoronaVirus जोकि टॉप
ट्रेंड में था, उसको भी #Ramayan ने पीछे छोड़ दिया। गूगल सर्च में रामायण टॉप पर पहुँच गया साथ ही प्रसार
भारती की वेबसाइट पर ट्रेफिक बढने से उसका क्रेश हो जाना, यह लोगों के बीच उसका क्रेज़ बताता है। सुबह-शाम प्रसारण के बाद सोशल
मीडिया पर चर्चा का माहौल बन जाना, बदलते भारतीय समाज
और अपने मूल से जुड़ते देश की तस्वीर बयाँ करता है। यह नये भारत के लिए अद्भुत पल
था कि पहली बार मेघनाथ की पहले दो दिन बुराई के बाद तीसरे दिन के प्रसारण में
जिसमें उसका लक्ष्मण के साथ आखिरी युद्ध व् वध दिखाया गया, उसमे उसकी प्रशंसा हुई। पहली बार मेघनाथ को करीब से युवा पीढ़ी ने जाना।
इसके साथ ही #कुम्भकरण ट्रेंड किया जब कुम्भकर्ण की
खुले मन से प्रशंसा भारतीय युवाओं ने की। श्री राम चरित्र को जानना, हर एक संवाद से भावनात्मक रूप से जुड़ना, व अपने
कर्तव्यबोध की शिक्षा रामायण ने दी, उसने समाज को जागृत
कर दिया। समाज में यह जागृति शायद ही कभी आ पाती। राजा कैसा होना चाहिए, उसके क्या कर्तव्य हैं, उसका आचरण क्या हो, व्यवहार क्या हो? जब इसपर रामायण में प्रसंग
आये तो भारत की वर्तमान सत्ता और चमत्कारिक नेतृत्व का महत्त्व लोगों को समझ आने
लगा। सन्यासी राजा जिसके लिए संसार में प्रजा व् राष्ट्र के आलावा कोई सगा
सम्बन्धी न हो, उस चरित्र पर जोर दिया गया तो
देशवासियों को अपने प्रधानमंत्री पर गर्व हुआ।
रामायण में दो घटनाएँ ऐसी हैं, जब श्री
राम पर ऊँगली उठाने का मौका कुछ लोगों को मिलता है। पहला बाली वध और दूसरा सीता
त्याग। इन दोनों ही मौका मिलने का कारण अज्ञान है। इस अज्ञान को भी रामायण के पुनः
प्रसारण ने हमेशा के लिए समाप्त कर दिया। रामायण में श्री राम के राजसिंहासन पर
आरूढ़ होने के साथ ही रामायण सीरियल समाप्त होगया लेकिन आगे की घटनाओं को उत्तर
रामायण नाम से शुरू कर दिया गया। यह रामायण का सबसे करुण भाग है। उत्तर काण्ड में
भावनाएं दिल को छलनी कर देती है, राज धर्म और पति धर्म
में फंसे राम की पीड़ा रुला देती है। सीता का रघुकुल रीत को बचाने और पति को राज
धर्म से विमुख न होने देने के लिए स्त्री धर्म का सबसे बड़ा उदाहरण पेश करते हुए
स्वयं वन चले जाना, भारतीय समाज को अंदर तक हिला देता
है। इस महान कहानी के अंत आते आते सीता माँ का वन गमन रिश्तों-नातों, सम्बन्धों और उनसे जुड़े कर्तव्यों की नई
परिभाषा देता है साथ ही हजारों वर्ष पूर्व भारत में स्थापित उस महान शासन व्यवस्था
को भी सामने लाता है जिसमें राजा सबकुछ जानते हुए भी राजधर्म का पालन करते हुए
अपनी व्यक्तिगत हानि को भी सहन कर लेता है। प्रजा मत के आगे स्वयं का फैसला बदल
लेता है। सही मायने में प्रजातंत्र की इससे अच्छी तस्वीर कंहा मिलेगी? माँ सीता का अपनी शाही पहचान के बिना वाल्मीकि आश्रम में रहना और बिना
अपने अतीत का फायदा उठाये अपने बच्चों को स्वावलम्बी बनाना, स्त्री सशक्तिकरण की मजबूत तस्वीर तैयार करता है। बिना किसी शाही पहचान के
अपने अथक परिश्रम और वनवासी भेष, खानपान के साथ कुश और
लव का इतना मजबूत होजाना की मेघनाथ विजेता लक्ष्मण, लवड़ासुर
जैसे बलशाली को हराने वाले शत्रुघन और महा पराक्रमी भरत को युद्ध में धाराशायी कर
देना, यह प्रसंग न जाने कितनी ही अपने पति के बिना रहने
वाली स्त्रियों को अपने बच्चों की शिक्षा-दीक्षा के लिए
प्रेरित करता होगा। लव-कुश अपनी माता के प्रति प्रजा में व्याप्त भावना को हटाने
और उनके दिल पर आघात करने के लिए निकला करुण गीत हम सबके आँखों में आंसू ला देता
है। तमाम पश्चिमी गानों, वर्तमान के हिप-हॉप सोंग को चाप से सुनने वाली युवा पीढ़ी, डीजे
पर थिरकने वाले युवा और रैप को श्रेष्ठ गीत बताने वाले बच्चे जब "हम कथा
सुनाते श्री राम की" गीत को बार बार सुनने को
तैयार हो जाएँ, तो समाज जागृति वैसे ही सम्भव हो जाती
है।
स्त्री
चरित्र को हमेशा से कटघरे में रखने की समाज परम्परा पर गहरा आघात करती रामायण की
उत्तर काण्ड की कहानी स्त्री की जिम्मेदारी, कर्तव्य, सहनशीलता, त्याग और शक्ति को प्रस्तुत करती है।
समाज के सामने अंत में भी जब सीता को परीक्षा देने के लिए महाराज राम द्वारा कहा
जाता है तो अंदर रोते बिलखते पति और दो बच्चों के पिता को स्पष्ट देखा जा सकता है।
राजधर्म में मजबूर राजा जब पवित्रता की शपथ के लिए माँ सीता से कहता है तो माँ
सीता ऐसी शपथ लेती हैं जोकि युगों युगों तक शिलालेख की भांति अमर हो जाती है।
बार
बार स्त्री पर उठते सवाल का उत्तर माँ सीता कुछ ऐसे देती हैं जो हम सबके सीने को
भावना और संवेदना के तीर से छलनी कर देता है और पीछे छोड़ देता है अपनी गलती पर
पछताते समाज को और एक राजा के कर्तव्य को कभी न त्याग पाने वाले राम को रोते
बिलखते।
रामायण
एक अमर कहानी है। वाल्मीकि जी ने वास्तव में जो देवतुल्य कार्य इसके लिखित रूप
देने से किया वह आज युगों के बीतने पर भी वैसे ही पवित्र है। इसके साथ ही तकनीक के
साथ पर्दे पर उतारने का कार्य जो रामानंद सागर ने किया वो सर्वश्रेष्ठ है। साथ ही
महान हैं वो किरदार जिन्होंने रामायण सीरियल को भी मानव के तकनीकी इतिहास का सबसे
अमिट सीरियल बना दिया। रामायण सीरियल का बनना शायद ही कोई देव कृपा रही होगी। आज 02 मई को रामायण के उत्तर कांड का अंतिम प्रसारण होना बाकि है। अभी रामायण
सीरियल ने एक और रिकॉर्ड अपने नाम किया है। वह है विश्व का सबसे ज्यादा देखे जाने
वाले सीरियल का रिकॉर्ड। बीते 16 अप्रैल को रामायण
को 7 करोड़ से ज्यादा लोगों ने एक साथ देखा जोकि
अभी तक कभी नही हुआ था। रामायण सीरियल का प्रसारण आज भले ही समाप्त हो रहा हो, लेकिन कोटि कोटि भारतीयों के दिल में रामायण द्वारा जो ज्योति जली है वह
हमेशा रहेगी।